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मस्ती की पाठशाला

अपनी परिस्थितियों की बेड़ियों को तोड़ते हुए आगे बढ़ना, हार न मानकर ज़िंदगी जीने का यह जो जज़्बा है यह किसी मिसाल से कम नहीं।




यूँ ही कुछ दिनों पहले मेरी तीन बच्चों से एक अनजान सी दोस्ती हुई।और इस दोस्ती से एक नए मजेदार सफर की शुरुआत हुई। हमारी पहली मुलाकात वाट्सऐप वीडियो कॉल पर हुई, क्योंकि आप लोग तो जानते ही हैं कि अभी कोरोना वायरस की वजह से प्रत्यक्ष मिलना संभव नहीं है। ये तीनों एक महानगर के पास की उजड़ी-अधउजड़ी झुग्गी बस्तियों के निवासी हैं।शमा, बबली और मुस्कान को मैं हफ्ते में ५ दिन अंग्रेजी पढ़ाती हूँ। हालाँकि शमा को शिकायत रहती है कि २ दिन भी छुट्टी क्यों मिल रही है, बोर हो जाएँगे, लेकिन मेरा मानना यह है कि दो दिन बेरोकटोक थोड़ा ऊधम करना तो अच्छी सेहत के लिए अनिवार्य है।  यह कहना उचित होगा कि आज कल मेरे दिन की शुरुआत इन तीनों के साथ होती है। हम हर सुबह 11:00 बजे मिलते हैं और एक घंटा साथ में पढ़ते हैं।  जब मैंने सोचा था पढ़ाने का तो मुझे लगा था कि अपनी छुट्टियों में कोई क्यों ही पढ़ना चाहेगा, क्योंकि आज तक मुझसे तो कभी छुट्टियों में पढ़ाई नहीं हुई। लेकिन इन तीनों की सीखने की जो ज़िद है वह मुझे अचंभित कर गई।  और मेरा यह मानना है कि पढ़ना, नई चीजें जानना और समझना अपने आप में एक बहुत ही रोचक अनुभव है और इसको कभी भी बोझ बनाकर नहीं करना चाहिए। इसलिए मेरी यही कोशिश रहेगी कि ये तीनों जितना भी पढ़ें, मस्ती से पढ़ें। इसी कोशिश को अंजाम देने के लिए मैं तीनों को हर क्लास के अंत में कोटेशन देती हूँ, कभी अंग्रेजी तो कभी हिंदी में। कभी कोई अच्छी कविता या कभी परमहंस योगानंद जी की किताब की एक दो अच्छी लाइनें सुना देती हूँ। हम साथ में गाने भी गाते हैं और क्लास के बीच में हँसी-मजाक तो चलता ही रहता है।  मैं उम्मीद करती हूँ कि शमा, बबली और मुस्कान आज जो सीख रहे हैं, इससे इनकी आगे मदद ज़रूर होगी पर मैं इतना तो तयशुदा रूप से जानती हूँ कि जो मैंने इन तीनों से सीखा है, वह मेरे साथ जीवन भर रहेगा। तीनों में सीखने की जो अद्भुत ललक है और कुछ नया जानने की जैसी उत्सुकता है, वह इतनी ज्यादा ताज़गी देने वाली है कि यह मुझे हर रोज प्रेरित करती है। हर रोज क्लास से पहले बबली पिछले दिन का गृहकार्य करके भेज देती है। शमा को कोटेशन याद करना और क्लास के अंत में सुनाना बहुत पसंद है और हमारी मुस्कान दीदी की एक्टिंग के क्या ही कहने। क्लास की बीच में मैं तीनों को देश-दुनिया से जुड़ी रोचक बातें बताती रहती हूँ....बस यह मेरी एक छोटी सी कोशिश उनको बाहरी दुनिया के करीब लाने के लिए और दुनिया की एक बेहतर समझ देने के लिए।  एक दिलचस्प बात यह भी है कि कहने को तो मैं इनको पढ़ा रही हूँ लेकिन इस रिश्ते से जिंदगी मुझे भी कम नहीं सिखा रही है।न कभी उनके माथे पर एक शिकन दिखती है, न ही कोई नाराज़गी है, बस है तो केवल सीखने का जुनून।  यह जो मुश्किलों का पिटारा है अभी तो केवल थोड़ा ही खुला है।

कई लड़ाइयाँ लड़ी जानी बाकी हैं अभी, कई मैदान फतह करने बाकी हैं। यह सफर अपनी अड़चनें लेकर जरूर आया है, पर मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि यह अड़चनें इतनी भी मज़बूत नहीं कि इन तीनों के हौसले को डिगा सके। 

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